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Prithviraj Chauhan Biography In Hindi ( History, Death Story, Ghori ) - Mera Biography

Prithviraj Chauhan Biography In Hindi 

भारत देश का इतिहास जितना गहरा है उसमें उतनी ही ज़्यादा वीर योद्धा भी शामिल है. अब चाहे आप बात करें रानी लक्ष्मीबाई की महाराणा प्रताप की या फिर छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह ही और भी हजारों लोगों की हालांकि देश के अंदर समय-समय पर बहुत सारे ऐसे लोगों ने वीरता का प्रमाण दिया है.

हम एक ऐसे ही योद्धा के बारे में बात करने वाले हैं जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है. मैं बात कर रहा हूँ भारत के वीर पृथ्वीराज चौहान की जिन्होंने अपने आप को कुछ इस तरह से तैयार किया था कि सिर्फ़ आवाज़ सुनकर और बिना देखे ही वह दुश्मनों पर निशाना साध सकते थे. 

पृथ्वीराज चौहान जिन्होंने मोहम्मद ग़ोरी जैसे खूंखार और खतरनाक दुश्मन को न केवल एक दो बार बल्कि लगातार 17 बार हराया था. साथी मुगल शासन से पहले दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाले अंतिम हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान थे. क्या था पृथ्वीराज चौहान की महानता जिसकी वज़ह से सैकड़ों साल बाद उन्हें याद किया जाता है.

Prithviraj Chuhan History/Itihas In Hindi 

नाम पृथ्वीराज चौहान
जन्मदिन 1166, गुजरात
पिता राजा सोमेश्वरा
माता रानी
धर्म हिन्दू
विवाहिक स्तिथि विवाहित

कहानी की शुरुआत होती है 1104 से जब पृथ्वीराज चौहान का जन्म अजमेर में राजा सोमेश्वर चौहान के घर पर हुआ था. पृथ्वीराज के माँ का नाम था करपुरा देवी. पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही घुड़सवारी और तलवारबाजी जैसे खेलों के शौकीन थे लेकिन उनकी जो सबसे ख़ास विशेषता होती शब्दभेदी बाण चलाना दरअसल इसका मतलब है कि आँख बंद होने के बावजूद सिर्फ़ आवाज़ को सुनकर ही वह बिल्कुल सटीक निशाना लगा लेते थे और इन सभी विशेषताओं का पता जब पृथ्वीराज के नाना और उस समय दिल्ली के राजा आनंदपाल को लगी.


तब उन्होंने पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का राजा बनाने का निर्णय ले लिया और फिर इसी कड़ी में ही सिर्फ़ 16 साल की उम्र में पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली की राजगद्दी संभाली और फिर राजा बनने के बाद उन्होंने किले का निर्माण करवाया जिसका नाम था पिथौरागढ़.

पृथ्वीराज चौहान का बचपन अजमेर में गुजरा था इसलिए दिल्ली का राजा बनने के बाद भी उनका मन अजमेर में ही अटका हुआ था और फिर इसी वज़ह से आगे चलकर उन्होंने दोनों नगरों को राजधानी बना दिया. पृथ्वीराज चौहान ने लगातार कई सारे विजय अभियान चलाकर अपने राज्य की सीमाओं को गुजरात और पूर्वी पंजाब तक बढ़ाकर और भी बड़ा कर लिया था. 

इतनी ज़्यादा तरक्क़ी को देखते हुए काफ़ी सारे राजाओं के मन में उनके लिए जलन की भावना भी पैदा होने लगी और उन्हीं राज्यों में से एक भेजा चांद जिनकी राजधानी थी कन्नौज. एक तरफ़ जहाँ जयचंद पृथ्वीराज चौहान की प्रसिद्धि से जलते थे वहीं उनकी लड़की संयोगिता पृथ्वीराज चौहान के साहस और वीरता से प्रभावित थी.

वह पृथ्वीराज को अपना दिल दे बैठी थी हालांकि जब इस बात की ख़बर राजा जयचंद को मालूम हुई तो वह गुस्से से आगबबूला हो गए और फिर गुस्से में ही उन्होंने निर्णय लिया कि बेटी की शादी जल्द से जल्द कर देंगे और इसी के साथ उन्होंने पृथ्वीराज चौहान को अपमानित करने के लिए प्लान बना ली, फिर कुछ इसी तरह से जयचंद ने अपनी पुत्री के विवाह के लिए एक स्वयंवर का आयोजन किया इसमें किस संयोगिता अपने पसंद के वर्क को चुन सकते थे.


राजा जयचंद ने सभी छोटे-बड़े राजाओं को निमंत्रण दिया लेकिन पृथ्वीराज चौहान को उन्होंने छोड़ दिया था और फिर पृथ्वीराज का मज़ाक बनाने के लिए उनकी मूर्ति बनाई और द्वारपाल बनाकर शादी मंडप के गेट पर खड़ा कर दिया हालांकि जब इस बात की ख़बर जयचंद की बेटी को पता लगी तब वह बहुत ही दुखी हो गई हालांकि वह चुनते समय उन्होंने किसी के गले में माला डालकर पृथ्वीराज चौहान की मूर्ति को बना दिया और फिर यह सब कुछ देख कर विभाग इंडिया के सभी राज्य हक्के बक्के रह गए थे. 

दोस्तों असल कहानी तो तब शुरू होती है जब मूर्ति के पीछे से सच में पृथ्वीराज चौहान निकले और फिर वह संयोगिता को अपने घोड़े पर बैठा कर वापस आ गए हल्की दोस्तों इसी दौरान अफगानिस्तान का शासक मोहम्मद ग़ोरी भारत की तरफ़ बढ़ रहा था और उसने पश्चिम पंजाब तक अपना शासन स्थापित कर लिया था और फिर पृथ्वीराज चौहान की सीमा भटिंडा के किले पर भी उसने हमला बोल दिया.


जैसे ही इस बात की ख़बर राजा को लगी तो वह अपनी सेना को लेकर भटिंडा पहुँच गए और दोस्तों एक और जहाँ मोहम्मद ग़ोरी की सेना नशे में चूर थी वही पृथ्वीराज चौहान की सेना देश भक्ति में भरी हुई थी और फिर पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद ग़ोरी के बीच हुए युद्ध में मोहम्मद ग़ोरी को मुंह की खानी पड़ी. इस युद्ध के बाद भी मोहम्मद ग़ोरी ने लगातार 16 बार आक्रमण किया लेकिन हर बार ही उसे हार का मुंह देखना पड़ता था.

लेकिन उसको जब इस बात की ख़बर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता के पिता यानी कि जयचंद्र को मालूम पड़ी तब अपना बदला लेने के लिए इस मौके को उन्होंने बिल्कुल सही समझा. इसी कड़ी में ही जयचंद मोहम्मद ग़ोरी के साथ मिल गया और फिर 2 साल के बाद से 1192 में मोहम्मद ग़ोरी ने पृथ्वीराज चौहान का एक बार फिर से युद्ध के लिए ललकारा. इस बार मोहम्मद ग़ोरी के पास 120000 सैनिकों की विशाल सेना थी.

इसके बावजूद भी पृथ्वीराज चौहान ने उसे पिछली हारों को याद दिलाते हुए वापस लौट जाने की बात कही और फिर मोहम्मद ग़ोरी ने पृथ्वीराज चौहान को धोखा देने के लिए अपनी सेना भी थोड़ी पीछे लेने और इसी वज़ह से पृथ्वीराज चौहान को यह लगा कि मोहम्मद ग़ोरी उनकी बात को मान गया है. हालांकि मोहम्मद ग़ोरी तो सही समय का इंतज़ार कर रहा था. 

1 दिन बिल्कुल सुबह जब पृथ्वीराज चौहान के सभी सैनिक पूजा पाठ में व्यस्त थे. तब मोहम्मद ग़ोरी ने उन पर हमला कर दिया और फिर पृथ्वीराज चौहान को चारों तरफ़ से घेर कर उन्हें और उनके प्रिय मित्र चंदबरदाई को बंदी बना लिया. 

क्या आना कि बंदी बनाए जाने के बाद से जब पृथ्वीराज को मोहम्मद ग़ोरी के सामने दरबार में पेश किया गया तब पृथ्वीराज ने मोहम्मद ग़ोरी को चेतावनी देते हुए यह कहा कि तुम मुझे मार दो नहीं तो आगे चलकर तुम्हें पछताना पड़ेगा. लेकिन दोस्तों लगातार 17 बार हारा हुआ मोहम्मद ग़ोरी तो पृथ्वीराज चौहान तो घुट-घुट कर मर ना देखना पसंद करता था. 

इसीलिए उसने पृथ्वीराज चौहान अभी ना मारने की बात कही. हालांकि दरबार में पृथ्वीराज चौहान सीना तान कर खड़े थे और यह देखकर मोहम्मद ग़ोरी ने कहा कि तुम राजा के दरबार में खड़े हो अपनी नजरों को नीचे रखो. इसका जवाब भी पृथ्वीराज चौहान ने ऐसा दिया कि सभी के रोंगटे खड़े हो गए. 

उन्होंने कहा कि एक सच्चे राजपूत की नजरें केवल मौत ही झुका सकती है और फिर इस बात को सुनकर मोहम्मद गौरी ने गुस्से में आकर पृथ्वीराज चौहान के आंखों को पढ़ने का आदेश दे दिया और फिर आखिरकार उन्हें अंधा करके जेल में डाल दिया गया. लेकिन उसको पृथ्वीराज चौहान के प्रिय मित्र चंदन भाई का यह दर्द देखा नहीं गया और फिर उन्होंने मोहम्मद ग़ोरी को सबक सिखाने का ठान लिया.

इसी कड़ी में ही चंदबरदाई ने मोहम्मद ग़ोरी के दरबार में हाज़िर होने की इच्छा जताई. दरअसल उन्होंने बताया कि पृथ्वीराज बिना देखे हुए लक्ष्य पर सटीक निशाना लगा सकते हैं, पर अगर भरोसा ना हो तो राजा के सामने वह अपने प्रिय मित्र से ऐसा करतब दिखाने को कहेंगे और दोस्तों इस बात का पता लगने के बाद से मोहम्मद ग़ोरी ने फिर से चंद्रवरदाई और पृथ्वीराज चौहान को अपने दरबार में बुलाया.


इस बार पृथ्वीराज चौहान को तीर और धनुष देकर दरबार के ही किसी आदमी ने अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए कहा लेकिन उसको पृथ्वीराज चौहान ने उत्तर दिया कि मैं एक राजा हूँ और इसी वज़ह से मैं केवल सुल्तान यानी कि मोहम्मद ग़ोरी के हुकुम का ही पालन करूंगा और यह बात सुनकर मोहम्मद ग़ोरी ख़ुशी से झूम उठा था. अपने मुंह से बोलते हुए पृथ्वीराज चौहान को उसने निशाना लगाने का आदेश दिया और दोस्तों जैसा कि आप सभी को मैंने पहले ही बताया कि पृथ्वीराज चौहान के अंदर ऐसी काबिलियत थी कि सिर्फ़ आवाज़ सुनकर ही वह सटीक निशाना लगा सकते थे.


इसी तरह से उन्होंने मोहम्मद ग़ोरी की आवाज़ सुनते ही अपनी बाढ़ की दिशा बदली और मोहम्मद ग़ोरी को भेज दिया था. जिससे कि मोहम्मद ग़ोरी की उसी समय ही मृत्यु हो गई हालांकि अब पृथ्वीराज चौहान और उनके मित्र चंदबरदाई यह जानते थि की उनकी जान को नहीं बख्शा जाएगा और इसे भी अपने दुश्मनों से हारने की वज़ह उन्होंने एक दूसरे को छुरा मारकर हत्या कर ली. 

जब पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु की ख़बर उनकी पत्नी संयोगिता ने सुनी तब उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए. हालांकि इस महान योद्धा को आज भी लोग याद करते हैं और जब कभी भी साथी लोगों को याद किया जाता है तो उस समय इस राजपूत का नाम हमारे मन में सबसे पहले आता है.

पृथ्वी राज चौहान की मौत की कहानी क्या है? 


पृथ्वीराज चौहान के बारे मे 2 कहानी जो की बहुत फेमस हैं. तो पहली कहानी के अनुसार जब चंदबरदाई जो की पृथ्वीराज चौहान का दरबारी कवि और दोस्त था. उसने अपनी किताब " पृथ्वीराजरासो " मे इस प्रकार बताया हैं की पृथ्वीराज को युद्ध मे हारने के बाद मोहम्मद ग़ोरी ghazni ( Afghanistan ) को लेकर चलेगया था. वहां जाकर पृथ्वीराज का दोनों आँखों को लोहा के रॉड से फुड़वा दिया और उनको अंधा कर दिया. 

एक दिन जब पृथ्वीराज को गौरी के सामने लेकर आया गया तब चंदबरदाई वही पर थे. उन्होंने मोहम्मद ग़ोरी को कहा की शब्दभेदी बाण प्रतियोगिता करने के लिए कहा. ग़ोरी को इस बात पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन इस कला का प्रतियोगिता करने के लिए कहा. जब यह कला का प्रतियोगिता शुरु करने को कहा तब चंदरबरदाई ने एक दोहा कहा. 

जब इस दोहे को कहकर चंदबरदाई ने पृथ्वीराज चौहान को बता दिया की ग़ोरी कहा हैं. जैसे ही मोहम्मद ग़ोरी  ने कहा तभी पृथ्वीराज चौहान ने आवाज सुनकर गौरी को तीर से मार दिया. जब सैनिको ने Prithviraj Chauhan और चंदबरदाई ने एक दूसरे को बार दिए, क्यों की वो नहीं चाहते थे की वो दुसरो के हाथो से मारा जाये. 

लेकिन अभी भी कई लोग मानते है  की Prithiviraj Chauhan का मौत ऐसा नहीं हुआ. और भी कई कहानी हैं जिसमे बोला गया हैं की उनका ऐसा मौत हुआ. 

पृथ्वीराज चौहान के कुछ तथ्य ( Facts of Prithviraj Chauhan ) 


1) कहा जाता हैं की पृथ्वीराज चौहान को 6 भाषा आती थी. 

2) पृथ्वीराज और भी कई चीज़ो मे रूचि था जैसे की Mathematics, History, Medicine, Philosophy, Painting, and Theology. 

3) मोहम्मद ग़ोरी  को 17 बार हराया था. 

4) पृथ्वीराज चौहान आल्सो known as हिन्दूसम्राट और पृथ्वीराज दृतीय.

बॉलीवुड मूवी पृथ्वीराज चौहान रिलीज़ डेट ? 

पृथ्वीराज चौहान के ऊपर ही बॉलीवुड में एक मूवी बन रही है जिसका नाम है पृथ्वीराज और फिलहाल 13 नवंबर 2020 को इसका रिलीज डेट रखा गया था, लेकिन कोरोना वायरस के कारण मूवी कब रिलीज़ होगा ए तो अभी नहीं कहा गया हैं. देखते हैं की ए मूवी कब रिलीज़ होने वाली हैं. 

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